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प्रदेश में बढ़ रही है भुखमरी और राज्य सरकार दुबली हो रही बड़ों की चिंता में : माकपा

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ में फंसे दूसरे राज्यों के मजदूरों तथा हमारे प्रदेश में आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को लॉक डाउन से उत्पन्न भुखमरी से निपटने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भी केंद्र सरकार की […]

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ में फंसे दूसरे राज्यों के मजदूरों तथा हमारे प्रदेश में आर्थिक व सामाजिक रूप से कमजोर लोगों को लॉक डाउन से उत्पन्न भुखमरी से निपटने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार भी केंद्र सरकार की तरह ही रोज कमाने-खाने वाले जरूरतमंदों तक प्रत्यक्ष सहायता पहुंचाने के बजाय ख़जाना संपन्न वर्ग के लिए खोल रही है। भुखमरी से निपटने के लिए केवल चार करोड़ रुपयों का आबंटन तथा बस-ट्रक मालिकों को 331 करोड़ रुपयों की राहत देने का फैसला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि पूरे प्रदेश से लगातार शिकायतें आ रही है कि लोग जहां-तहां फंसे हुए हैं, लेकिन सरकारी राहत उन तक पहुंच नहीं रही है। सरकारी अमला भी खुद इंतजाम करने के बजाय, एनजीओ की पहलकदमी पर निर्भर होकर रह गया है, जिनके काम करने की अपनी सीमाएं हैं।

उन्होंने कहा कि रायपुर नगर निगम क्षेत्र में ही पहले पार्षदों द्वारा और फिर मितानिनों द्वारा गैर-राशन कार्डधारी गरीब परिवारों को चिन्हित करवाया गया था। बाद में इन चिन्हित परिवारों को आधार कार्ड मांगकर परेशान किया गया। इस प्रक्रिया में 25000 से ज्यादा परिवार चिन्हित हुए हैं, जो अत्यंत गरीब हैं और भुखमरी का शिकार हो रहे हैं। लेकिन लॉक डाउन के एक सप्ताह बाद भी खाद्यान्न पैकेट उन तक नहीं पहुंचे हैं और नगर निगम जोनवार सौ परिवारों से ज्यादा को खाद्यान्न मदद देने के लिए तैयार नहीं है। जब राजधानी का यह हाल है, तो पूरे प्रदेश की स्थिति का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।

माकपा नेता ने कहा कि केंद्र सरकार के अनियोजित लॉक डाउन और ऊपर से राज्य सरकार द्वारा गरीबों की आजीविका की सुरक्षा के लिए किसी भी आर्थिक पैकेज की घोषणा न करने से प्रदेश के हालात और गंभीर हो रहे हैं। इन जरूरतमंदों को सीधी मदद करने के बजाय सरकारी खजाना उन ट्रक व बस मालिकों के लिए खोला जा रहा है, जिन्हें फिलहाल तात्कालिक मदद की जरूरत नहीं है। पराते ने कहा कि सभी जानते हैं कि राज्य के परिवहन उद्योग में कांग्रेस-भाजपा से जुड़े राजनेताओं, अधिकारियों व ठेकेदारों की अवैध कमाई लगी हुई है और राज्य सरकार इन्हीं लोगों के मुनाफे की चिंता में दुबली हो रही है।

माकपा नेता ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से इस प्रदेश के लोगों, किसानों व मजदूरों को केंद्र में रखकर एक बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित करने की अपनी मांग को पुनः दोहराया है, ताकि भुखमरी से निपटने के साथ ही इस प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी बचाया जा सके। माकपा ने कालाबाजारी और महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए सभी जीवनोपयोगी आवश्यक वस्तुओं के मूल्य निर्धारित करने के साथ ही इस प्रदेश में रहने वाले सभी लोगों और अप्रवासी मजदूरों के लिए दो माह का राशन पैकेट, जिसमें खाद्यान्न, दाल, तेल, साबुन व मास्क शामिल हो, मुफ्त उपलब्ध कराने की मांग की है।