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घोर लापरवाही: तीन दिन तक नहीं हो सका महिला का अंतिम संस्कार.. पोस्टमार्टम के लिए भटकते रहे परिजन

कोरिया  से नूरजहां खातून की रिपोर्ट आखिर इर घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन.? भालू के हमले से शिकार हुई थी महिला .. एक महीने बाद अचानक बिगड़ी हालत, मौत.. अस्पताल प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम के लाश  परिजनों को सौंप दी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए कहा.. इस बीच तीन दिन बीत गए। कोरिया. जिले […]

Negligence in Korea district

कोरिया  से नूरजहां खातून की रिपोर्ट

आखिर इर घोर लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन.? भालू के हमले से शिकार हुई थी महिला .. एक महीने बाद अचानक बिगड़ी हालत, मौत.. अस्पताल प्रबंधन ने बिना पोस्टमार्टम के लाश  परिजनों को सौंप दी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए कहा.. इस बीच तीन दिन बीत गए।

कोरिया. जिले के जिला अस्पताल की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है कि एक महिला की मौत के बाद बिना पोस्टमार्टम के लाश परिजनों को सौंप दी गई। परिजन जब पुलिस को सूचना देने जाते हैं तो पुलिस कहती है कि लाश का पोस्टमार्टम तो होना ही चाहिए। ऐसे में उस परिवार पर क्या बीत रही होगी जिसके घर में मातम हो और उन्हें सरकारी नियम कायदों से जूझना पड़ा रहा हो।

दरअसल यह पूरा मामला खड़गवां विकासखंड के ग्राम बरदर का है, जहाँ 45 साल की महिला सोन कुँवर पर पिछली 25 दिसंबर को भालू ने हमला कर दिया था। घायल सोन कुँवर को खड़गवां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज के लिए भर्ती किया गया था। सात दिन बाद सोन कुँवर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और एक इंजेक्शन लगाने के लिए सात दिन बाद फिर बुलाया गया था। लगभग एक महीना के बाद अचानक महिला की तबियत फिर से बिगड़ गई तो इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी इलाज के दौरान महिला सोन कुँवर की मौत 10 फरवरी को हो गई।

जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला का पोस्टमॉर्डम किए बगैर ही लाश सौप दी। परिजनों मुक्तांजली वाहन से महिला की बॉडी गांव ले आए। दूसरे दिन जब इसकी सूचना पुलिस को देने गए तो खड़गवां पुलिस ने मामले की गंभीरता दो देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी और महिला की लाश को पोस्टमॉर्डम करने के लिए कहा।

जिसके बाद आज तीसरे दिन खड़गवां अस्पताल के डॉक्टर के द्वारा लाश का पोस्टमॉर्डम किया गया। भालू के हमले से महिला की मौत हुई थी लिहाजा वन विभाग अमला भी पोस्टमॉर्डम स्थल में मौजूद रहा। बड़ा सवाल ये है कि क्या महिला की मौत के बाद जिला अस्पताल को स्थानीय थाने में इसकी सूचना नही देनी चाहिए थी..? आखिर बिना पोस्टमार्टम के परिजनों को लाश सौंपे जाने के पीछे और क्या कारण है..?