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कोरिया: इस नवरात्र पांच बार सर्वार्थ सिद्धि और दो बार आएगा रवि योग

पद्मिनी मरावी@कोरिया. नवरात्र को लेकर माता रानी के मंदिरों के साज सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नवरात्र से पहले मंदिरों में आकर्षक लाइटें और निर्माण के अन्य कार्य चल रहे हैं। क्षेत्र में कई ऐसे मंदिर है, जहां पर भक्त मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं इसमें रतनपुर की महामाया मंदिर, रमदईया धाम मंदिर, […]

Navaratri ready preparations

पद्मिनी मरावी@कोरिया. नवरात्र को लेकर माता रानी के मंदिरों के साज सज्जा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नवरात्र से पहले मंदिरों में आकर्षक लाइटें और निर्माण के अन्य कार्य चल रहे हैं। क्षेत्र में कई ऐसे मंदिर है, जहां पर भक्त मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं इसमें रतनपुर की महामाया मंदिर, रमदईया धाम मंदिर, भरतपुर में चांग माता का मंदिर सहित अन्य सभी मंदिरों में अच्छी खासी भीड़ देखी जाती है।

दरअसल चैत्र मास से ही भारतीय नववर्ष की शुरूआत होती है। इसके अलावा भारतीय पंचांग की गणना भी चैत्र नवरात्रि से आरंभ होती है। देवी आराधना का पर्व नवरात्रि इस बार छह अप्रैल से रेवती नक्षत्र के साथ शुरू हो रहा है। उदयकाल में रेवती नक्षत्र का योग साधना व सिद्घि में पांच गुना अधिक शुभ फल प्रदान करने वाला होगा। रेवती नक्षत्र पंचक का पांचवा नक्षत्र है।

शहर के मंदिरों में चैत्र नवरात्रि की तैयारियां व्यापक स्तर पर की जा रही हैं। सफाई व रंग-रोगन का काम शुरू हो गया है। चैत्र नवरात्रि छह अप्रैल से लेकर 14 अप्रैल तक पूरे नौ दिनों की रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार नौ दिनों के इस नवरात्रि में पांच बार सर्वार्थ सिद्घि और दो बार रवि योग आएगा, जो शास्त्रों की दृष्टि से श्रेष्ठ है।

ऐसे योगों में देवी साधना का विशेष फल प्राप्त होता है। धन तथा धर्म की वृद्घि करने वाली यह नवरात्रि इस बार खास होगा। इसके अलावा पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ऐसे शुभ संयोग में नवरात्रि में देवी उपासना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। घटस्थापना छह अप्रैल शनिवार को अभिजीत मुहूर्त में 11ः36 से 12ः24 के मध्य या प्रातः कालीन 6 बजकर 9 मिनट से 10.19 मिनट के बीच कर सकते हैं।

इस दौरान पूजन अत्यंत ही सुखदाई एवं फलदायी रहेगा। शहर के विभिन्ना देवी मंदिरों में नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर है। मंदिरों में ज्योति कलश स्थापना के लिए लोग दिनभर वहां जाकर बुकिंग करा रहे हैं। इसके लिए मंदिरों में भी दिनभर तैयारियां चल रही हैं। शहर व आसपास के देवी मंदिरों में नवरात्रि की तैयारियां जोरों पर है। मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलश स्थापना रूम को सुसज्जित भी किया जा रहा है। इस साल भी प्रायः सभी देवी मंदिरों में हजार से अधिक कलश प्रज्ज्वलित होने की संभावना है। इसमें घी व तेल ज्योति कलश दोनों शामिल रहेंगे।

इस दिन रहेंगे सर्वार्थ सिद्घि षष्ठी तिथि रवियोग

नवरात्रि में शुभ योग की शुरुआत छह अप्रैल को रेवती नक्षत्र से हो रही है। इसके बाद सात अप्रैल यानी द्वितीय तिथि को सर्वार्थ सिद्घि योग लक्ष्मी पंचमी योग होगा। वहीं गुरुवार 11 अप्रैल को षष्ठी तिथि रवियोग फिर से होगा। शुक्रवार 12 अप्रैल को सप्तमी तिथि सर्वार्थ सिद्घि योग होगा। रविवार 14 अप्रैल को नवमीं वैष्णव मतानुसार महानवमीं रविपुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्घि योग सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक होगा।

तंत्र साधना के लिए उत्तम

रेवती नक्षत्र का शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से एक घंटे तक स्पर्श होना, उदय काल से करीब 45 मिनट तक रहना तंत्र साधना की दृष्टि से सर्वोत्तम है। यह नवरात्रि यंत्र, तंत्र व मंत्र सिद्घि के लिए विशेष मानी जा रही है। इसमें धन प्राप्ति के लिए किए जाने वाले उपाय भी कारगर होंगे।

नए साल की शुरुआत

साल में पड़ने वाली चार नवरात्रि में चैत्र नवरात्रि का भी बड़ा महत्व होता है। इस नवरात्रि को पूरे शहर एवं आसपास गांवों में श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जाएगा। लोग अनुष्ठान, व्रत रखने घरों में भी तैयारियां करने लगे हैं। चैत्र नवरात्रि से हिन्दू पंचांग के नए साल की शुरुआत होती है।

अनुकूल बने रहेंगे ग्रह

वास्तुविद् केएल चौबे ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि से पहले मां आदिशक्ति अवतरित हुई थीं। श्रद्घालुओं द्वारा इन दिनों विधि-विधान से मां की पूजा-अर्चना करने पर मां प्रसन्ना होती हैं एवं मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्रि में पूजा, व्रत करने से सालभर ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहती है।

शुभ रहेगा ये भोग लगाना

वैसे तो भगवान को मीठा, फल कुछ भी लोग प्रसाद लगा देते हैं पर नवरात्रि में पूजा के साथ ही प्रसाद का भी अपना एक अलग महत्व रहता है, इसलिए माता के विशेष श्रृंगार के साथ ही उन्हें घी, शक्कर, दूध मिश्रित मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल भूरा का प्रसाद लगाना अच्छा होता है।