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‘नरवा, गरुवा, घुरवा अउ बारी’ ग्रामीणों की, ग्रामीणों के लिए, ग्रामीणों द्वारा विकसित और संवर्धित योजना : विनोद वर्मा

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने आज नया रायपुर के योजना भवन में राज्य योजना आयोग की ओर से आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सुराजी गांव बनाने के लिए ‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी’ योजना प्रारंभ की गई है। यह योजना दरअसल हमारे गांवों की साझा समृतियों के […]

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने आज नया रायपुर के योजना भवन में राज्य योजना आयोग की ओर से आयोजित एकदिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सुराजी गांव बनाने के लिए ‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी’ योजना प्रारंभ की गई है। यह योजना दरअसल हमारे गांवों की साझा समृतियों के पुनर्जागरण की योजना है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का ग्रामीण समाज नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी’ के महत्व के बारे में अच्छे से परिचित था। गांव के निवासी जानते थे कि बारिश के पानी को किस तरह से रोका जा सकता है, गाय कितनी उपयोगी है और घरों की छोटी बाड़ियों का क्या महत्व है लेकिन कालातंर में यह भुला दिया गया, बस उसे ही गांवों के युवाओं को याद दिलाना है।

कार्यशाला में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा ने नरवा और गरुवा दोनों विषयों पर विस्तार से अपनी बात रखी और कहा कि छत्तीसगढ़ में गायों की भूमिका दूध देने से अधिक थी लेकिन धीरे धीरे इसे भुला दिया गया और जल के संरक्षण के महत्व को भी हम भूल गए। नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी ग्रामीणों की, ग्रामीणों के लिए, ग्रामीणों द्वारा विकसित और संवर्धित योजना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश भर के कई प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों और कई गावों से आए कार्यकर्ताओं के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को ‘मास्टर ट्रेनर’ के रूप में प्रशिक्षित करने का कार्य शुरु किया गया है। ये सभी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर ‘नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी’ के बारे में ग्रामीणों से बात करेंगे और जल संरक्षण से लेकर गोठान निर्माण और वर्मी कंपोस्ट बनाने तक हर कार्य की निगरानी भी करेंगे।

योजना आयोग के सदस्य के सुब्रमण्यम ने कहा कि ‘नरवा, गरुवा, घुरुवा, बारी’ योजना में सभी नवोन्मेष को योजना आयोग की जिम्मेदारी की तरह ही देखा जाना चाहिए और आने वाले दिनों में आयोग इस योजना के क्रियान्वयन के लिए हर तरह से सहयोग करेगा।

कार्यशाला में ऑक्सफैम के आनंद शुक्ला, उर्मीमाला और रानी, प्रदान संस्था के सरोज महापात्र, शिरीष कल्याण और कुंतल मुखेर्जी, आकांक्षी जिलो की योजना से नीरजा के और वैभव जिंदल, आईसीआरजी के रेबेका एस डेविड, नमिता मिश्रा, वाटर एड के अनुराग गुप्ता, समर्थ ट्रस्ट की मंजीत बल, एसआईआरडी के आनंद रघुवंशी, सुराजी ग्राम समिति के मेहत्तर राम कश्यप, डीके दुबे, जवाहर सिंह मरकाम, लवकुश कश्यप, अजय सिंह ठाकुर और ब्रजेश गौराहा, सेवानिवृत्त तकनीकी संचालक प्रो. डॉ डीएस बल उपस्थित थे।