Home देश - विदेश मिशन चंद्रयान-2 का काउंडाउन शुरू, जानिए- किस लिहाज से है अहम

मिशन चंद्रयान-2 का काउंडाउन शुरू, जानिए- किस लिहाज से है अहम

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने मून मिशन चंद्रयान-2 को 14 और जुलाई की रात तड़के 2.51 बजे लॉन्च करेंगा। लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश  धवन सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से होगी। इसे  भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च के सफल होने के बाद करीब 55 दिन में […]

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मिशन चंद्रयान
मिशन चंद्रयान

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अपने मून मिशन चंद्रयान-2 को 14 और जुलाई की रात तड़के 2.51 बजे लॉन्च करेंगा। लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा के सतीश  धवन सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से होगी। इसे  भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-।।। रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। लॉन्च के सफल होने के बाद करीब 55 दिन में 6 और 7 सितंबर को चांज की सतह पर उतरेगा।

1 इसरो के अनुसार, पहले 17 दिन पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में स्थानांतरित करने वाले वक्र पथ पर डाला जाएगा। 22वें दिन यह चंद्रमा की कक्षा में पहुंच जाएगा। वहां अगले 27 दिन तक चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगाएगा। 50वें दिन लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए ऑर्बिटर से अलग हो जायेगा जबकि ऑर्बिटर उसी कक्षा में चक्कर लगता रहेगा। इक्यावनवें दिन से लैंडर की गति कम की जायेगी और 54वें दिन वह चंद्रमा पर उतरेगा।

2 इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा, ‘रविवार तड़के 6.51 बजे उल्टी गिनती शुरू हो गई।’ लगभग 44 मीटर लंबा 640 टन का जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क तृतीय एक सफल फिल्म के हीरो की तरह सीधा खड़ा है। रॉकेट में 3.8 टन का चंद्रयान अंतरिक्ष यान है। रॉकेट को ‘बाहुबली’ उपनाम दिया गया है।

3 अपने दूसरे मिशन में इसरो ने सॉफ्ट लैंडिंग का लक्ष्य रखा है। लैंडर दो मीटर प्रति सेकेंड की बेहद धीमी गति से आहिस्ते से चंद्रमा पर उतरेगा। चंद्रयान के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं जिन्हें एक समेकित मॉड्यूल में रखा गया है। इस मॉड्यूल का वजन 3850 किलोग्राम है। यह 3.1 गुना 3.1 गुना 5.8 मीटर के आकार का है।

4 लैंडर, जिसे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम नाम दिया गया है, चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। यह एक चंद्र दिवस यानी करीब 14 दिन तक आंकड़े जुटाने का काम करेगा। इस पर चार पेलोड हैं। इसका वजन 1471 किलोग्राम है और यह 650 वाट बिजली उत्पन्न कर सकता है।

5 चंद्रयान 2 अपनी उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पार्किंग में 170 गुणा 40400 किलीमीटर की कक्षा में रखेगा। धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3.844 लाख किलोमीटर है। चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे। लैंडर-विक्रम छह सितंबर को चांद पर पहुंचेगा और उसके बाद प्रज्ञान यथावत प्रयोग शुरू करेगा।

6 इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना, उसकी भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन, और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने वहाँ पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।