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बाल संरक्षण समिति की बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश, बालगृह के बच्चों के लिए की जाए शिक्षकों की व्यवस्था

आशीष बंगानी@धमतरी. कलेक्टर रजत बंसल की अध्यक्षता में आज सुबह जिला पंचायत की सभाकक्ष में जिला बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर ने समीक्षा करते हुए कहा कि बालगृह के 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की सूची बनाकर प्रस्तुत करें। इन्हें प्लेसमेंट के माध्यम से स्व रोजगार से जोड़ने […]

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Child Protection Committee

आशीष बंगानी@धमतरी. कलेक्टर रजत बंसल की अध्यक्षता में आज सुबह जिला पंचायत की सभाकक्ष में जिला बाल संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर ने समीक्षा करते हुए कहा कि बालगृह के 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों की सूची बनाकर प्रस्तुत करें। इन्हें प्लेसमेंट के माध्यम से स्व रोजगार से जोड़ने का कार्य किया जाए।

उन्होनें कहा जिले के बस स्टैण्ड, रेल्वे स्टेशन में घुमंतू बच्चों का रेस्क्यू टीम के माध्यम से पकड़कर उन्हें बालगृह में रखा जाए और उनके शिक्षक की व्यवस्था के लिए स्वयंसेवी या स्वप्रेरणा से भी शिक्षक के रूप में बच्चों को शिक्षा देने का आह्वान किया है। ऐसे शिक्षक जो स्वेच्छा से बालगृह के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने आना चाहते हैं, वे जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास से सम्पर्क कर अपनी सेवाएं दे सकते हैं।

बाल श्रम की रोकथाम हेतु गठित टीम द्वारा जिले के सभी होटलों, ढाबा, रेस्टोरेंट, दुकानों, फैक्ट्री, राईस मिल, ईंट भट्टा और बीड़ी निर्माण करने वाले एजेंसियों तथा अन्य स्थानों पर जहां पर बालकों से कठोर कार्य लिए जाने की संभावना है, वहां पर छापामारी कर कड़ी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जिले में नशामुक्त केन्द्र स्थापित कर उसके माध्यम से प्रतिदिन निरीक्षण कर नशा से निजात दिलाए जाने की बात कही।

धमतरी के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की रोकथाम हेतु ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति, विकासखण्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति की बैठक प्रत्येक तीन माह में किए जाने के निर्देश दिए। बच्चों के अवैध प्रवास एवं मानव व्यापार की रोकथाम के लिए पलायन पंजी प्रत्येक पंचायत स्तर पर संधारित किए जाने पर भी चर्चा की गई। बाल संरक्षण के पदाधिकारियों को बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय बोर्ड (बालकों के देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 तथा पाॅक्सो एक्ट 2012 के संबंध में भी बैठक में समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने बालगृह में निवासरत् बच्चों की प्रत्येक माह स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शिविर लगाए जाने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए। उन्होंने गांव के सभी बच्चों का टीकाकरण एवं जन्म व मृत्यु दर पंजीयन, ग्राम से गुमशुदा व गुमशुदा प्राप्त बच्चों की पंजीयन, आंगनबाड़ी केन्द्र एवं स्कूल में नामांकित बच्चों की नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर भी जोर दिया। साथ ही प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों सहित निजी नर्सिंग होम व अस्पतालों में शिशु पालना केन्द्र स्थापित करने संबंधी चर्चा बैठक में की गई।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत विजय दयाराम के., मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा. डी.के.तुर्रे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश्वर चंदेल, उप संचालक समाज कल्याण एम.एल.पाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग रेणु प्रकाश, बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक और यशवंत बैस उपस्थित रहे।