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अलग-थलग पाक के नापाक मंसूबों पर माकूल प्रहार

अनिल पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार घायल शेर की सांसें उसकी दहाड़ से भी अधिक गर्जनभरी होती हैं। पुलवामा के आतंकी हमले को जवाब में भातीय वायुसेना ने पराक्रमी-शौर्य का परिचय देकर जब इस सत्य को रेखांकित किया तो भारतीय स्वातंत्र्य समर के अमर सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्मरण हो आया, जिनके सम्पादन में प्रकाशित […]

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अनिल पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार

घायल शेर की सांसें उसकी दहाड़ से भी अधिक गर्जनभरी होती हैं। पुलवामा के आतंकी हमले को जवाब में भातीय वायुसेना ने पराक्रमी-शौर्य का परिचय देकर जब इस सत्य को रेखांकित किया तो भारतीय स्वातंत्र्य समर के अमर सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्मरण हो आया, जिनके सम्पादन में प्रकाशित होने वाले मराठी दैनिक ‘केसरी‘ में पंडितराज जगन्नाथ का एक श्लोक छपा करता था-

स्थितिं नो रे दध्याः क्षणमपि मदांधेक्षण सखे
गजश्रेणीनाथ त्वमिह जटिलायां बनभुवि।
असौ कुंभिभ्रांत्या खरनखरविद्रावितमहा-
गुरुग्रावग्रामः स्वपिति गिरिगर्भे हरिपतिः।।

अर्थात्- ए मदांध गजराज! तू इस बीहड़ वन में एक क्षण के लिए मत ठहरना। इस पर्वत गुफा में वह सिंहों का राजा सोया पड़ा है, जिसने हाथी की भ्रांति में बड़ी-बड़ी शिलाओं को अपने कठोर नखों से चूर-चूर कर दिया है।

आंतकवाद और भारत से शत्रुता में मदांध पाकिस्तान भारतीय अस्मिता के साथ इससे पहले भी कई बार खिलवाड़ करने का दुस्साहस करता आया है। 1948 के कबीलाई संघर्ष के बाद 1965, 1971 और 1999 में पाक अपनी शर्मनाक करतूतों और प्रकट व छद्म युद्ध में मात खा चुका था लेकिन उसकी अक्ल ठिकाने लगाने, उसे उसकी हैसियत बताने वाली निर्णायक कार्रवाई 26 फरवरी, 2019 को जब हुई तब उसने शिद्दत से महसूस किया कि विश्व-जनमत के सम्मान और शांति में विश्वास रखने वाले भारत की चेतावनियों को अनसुना करने की भारी कीमत उसे चुकानी पड़ रही है।

पुलवामा आतंकी हमले के 12 दिनों बाद भारतीय वायुसेना ने 48 साल के अंतराल में पाकिस्तान की सीमा में घुसकर जिस पराक्रम के साथ जैश-ए-मुहम्मद के सबसे बड़े आतंकी ठिकाने को नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया, उससे पाकिस्तान सदमे में आ गया और बौखला गया। इसी बौखलाहट में उसने अगले दिन भारतीय सीमा में अपने फाइटर विमान घुसाकर हमला बोलने की धृष्टता की, पर शायद पाक-हुक्मरान शायद यह भूल गए थे कि भारतीय सेना का मनोबल भारत की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति से ऊर्जस्वित हो रहा है और वह अब एक तरफ घर में घुसकर मारती है तो दूसरी तरफ घर में घुस आने वालों को भी मार गिराती है।

27 फरवरी को पाकिस्तान के एक फाइटर विमान का गिराकर भरतीय सेना ने यह जवाब दे दिया है। दरअसल, पाकिस्तान के मौजूदा व पुराने हुक्मरान समझ रहे हैं कि सीधी लड़ाई पाकिस्तान को तबाह ही करेगी लेकिन भारतीय हमले के बाद अपनी जनता के टूटे मनोबल, अपने खिलाफ उभरते जनाक्रोश और राजनीतिक विरोध को थामने की कोशिश में एक तरफ ऐसे बौखलाहट भरे कदम उठाने का दुस्साहस पाकिस्तान की विवशता है और दूसरी तरफ शांति-वार्ता के लिए गिड़गिड़ाना उसकी नियति! लेकिन इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि पाकिस्तान कोई सबक सीखने की तैयारी नहीं दिखाएगा।

बालाकोट हमले के बाद पाकिस्तान से ऐसी जवाबी सैन्य कार्रवाई की ही आशंका थी। भारत ने फिर करारा जवाब तो दिया पर हमारा एक बहादुर विंग कमांडर अभिनदंन इस कोशिश में पाक के कब्जे में आ गया। उसके शीघ्र सकुशल भारत लौटने का विश्वास हरेक भारतवासी को था ही। यह नहीं भूलना चाहिए कि सैन्य संघर्ष में ऐसे क्षण भी आते हैं पर बिना विचलित हुए लक्ष्य पर केन्द्रित रहना भारतीय सेना को आता है।

भारत ने कभी युध्द नहीं चाहा। लेकिन अपनी संप्रभुता, एकता, अखंडता और अस्मिता की कीमत पर भारत शांति-पाठ करता रहेगा, यह न तो मुमकिन था और न ही स्वीकार। इसलिए पुलवामा के आत्मघाती आतंकी हमले में शहीद हुए भारत मां के वीर सपूतों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देना भारत का लक्ष्य बना। आतंकवाद के ठिकानों और आतंकियों पर नकेल कसने की भारत समेत समूचे विश्व की अपील का असर पाकिस्तान पर हो नहीं रहा था।

उरी की सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत देने के बाद भी जो पाकिस्तान उसे झुठला रहा था, उससे यह उम्मीद बेमानी ही थी कि वह अपनी हर गल्तियों के सबूतों पर कोई सकारात्मक रवैया अपनाते हुए आतंक-विरोधी कदम उठाएगा। आदतन झूठ बोलने और मक्कारी के साथ बहानेबाजी करने वाले पाकिस्तान की ओर से पुलवामा हमले के बाद भी आतंकवाद के मसले पर कोई निर्णायक पहल नहीं हुई। देश के गुस्से ने पाक को इस बार कड़ा सबक सिखाने की प्रबल भावना व्यक्त की। भारत सरकार ने भारतीय सैन्य बल को आतंकी-ठिकानों को नष्ट करने की खुली छूट देकर संकेत दे दिया था कि इस बार भारत चुपचाप आंसू नहीं बहाएगा, बल्कि आतंक-पोषक पाक को खून के आंसू रुलाएगा।

भारत ने सबसे पहले पाकिस्तान का ‘सर्वाधिक तरजीह प्राप्त देश’ (मोस्ट फेवर्ड नेशन) का दर्जा खत्म कर और कस्टम ड्यूटी दो सौ फीसदी कर जहां उसके आर्थिक ढांचे पर प्रहारा किया, तो आतंकवाद को लेकर विश्व-समुदाय को अपने पक्ष में करके पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीतिक कोशिशों को अंजाम तक पहुंचाया। कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को प्राप्त सुरक्षा वापस लेना भी इसी रणनीति का एक अंग है।

पुलवामा के आतंकी हमले के जवाब में भारत की निर्णायक सैन्य कार्रवाई यकीनन पाक के मर्म पर माकूल प्रहार है, लेकिन पाक पर यह दबाव अभी और बनाए रखना होगा कि वह आतंकवाद को पालने-पोसने से तौबा करे। इसके साथ ही पाक के छल-प्रपंच से भी सतर्क रहकर प्रत्युत्तर देना भारत के लिए आवश्यक है। पाकिस्तान एक बार फिर छद्म युध्द की राह पकड़ेगा, यह अंदेशा बेवजह नहीं है क्योंकि सीधी लड़ाई उसके बस की बात नहीं है और पाक का राजनीतिक नेतृत्व आपसी विरोधाभासों और अंतर्द्वन्द्वों से जूझता अंततः फौजी दबाव में आता है। इसलिए अब भारत समेत सभी विश्व देशों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कड़े संदेश देने का समय आ गया है।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस दृढ़ता के साथ भारतीय सेना को इस निर्णायक कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया, उतनी ही तत्परता के साथ उन्होंने गैर-सैन्य कदम उठाकर पाक को उसकी हैसियत बताई। दोनों ही मोर्चों पर मिली कामयाबी में भारतीय स्वाभिमान का घोष गुंजित हुआ है। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई के भौतिक नतीजों की चर्चा और विश्लेषण तो बाद में होंगे, लेकिन रणनीतिक तौर पर यह हमला काफी महत्वपूर्ण सिध्द हुआ है। सवा दो साल पहले जब उरी में सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो पाक उसे झुठला सिर्फ इसलिए सका क्योंकि वह जमीन से जमीन पर हुई कार्रवाई थी।

विडंबना यह थी कि भारत में भी सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत उसी सुर में मांगे जाने लगे, जैसे पाकिस्तान मांग रहा था। इसलिए पुलवामा के मद्देनजर सैन्य कार्रवाई के लिए हवाई हमले को चुना गया क्योंकि यह तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभावी तौर पर प्रकट संदेश देता है और उसे नकारने की स्थिति नहीं होती। फिर यह कार्रवाई सिर्फ आतंकी ठिकाने को लक्ष्य करके की गई ताकि जवाबी कार्रवाई के लिए जो जरूरी था, वह पूरा हुआ। इसके मद्देनजर भारत ने रणनीतिक के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर सफलता अर्जित की।

अपनी कूटनीतिक सफलता को गंवाए बिना भारत ने जिस कौशल के साथ सैन्य कार्रवाई करके पाक को कठघरे में खड़ा किया है, वह अपने आप में अहम है। ऐसा करके भारत ने स्थिति को अपने काबू से बाहर भी नहीं जाने दिया। जो भारतीय वायुसेना चिकोठी, मुजफ्फराबाद से होकर बालाकोट तक पहुंच सकती थी, उसके लिए बहावलपुर में छिपे बैठे मसूद अजहर तक पहुंचना कठिन तो नहीं था। पर ऐसा नहीं करके पाकिस्तान के भीतर स्थित आतंकी कैंपों को निशाना बनाया गया।

यही सर्जिकल या एयर स्ट्राइक की रणनीति भी है। वह चिह्नित आतंकी ठिकानों पर की जाती है और इसलिए भारत ने नपी-तुली कार्रवाई करके क्षमतावान राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व का परिचय दिया। इससे कूटनीतिक तौर पर आतंकवाद के खिलाफ हमें अर्जित अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी जुड़ा रहा और पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व भी दबाव में आ गया। अब इस कार्रवाई के बाद विश्व समुदाय के आतंकवाद पीड़ित देश भी मुखर हो सकेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान पर आतंकवाद रोकने के लिए जरूरी दबाव भी बना पाएगा।

अब पाकिस्तान इसे लेकर क्या रुख आख्तियार करेगा, यह देखना होगा। भारत जिस असर की उम्मीद इस हमले से रख रहा है, पाकिस्तान उसे नकारकर या तो चुप रहता या फिर जवाबी सैन्य कार्रवाई करता। लेकिन भारत द्वारा बालाकोट में वायुसेना की कार्रवाई को स्वीकार करने के बाद पाकिस्तान का मुकरना या चुप रहना ज्यादा मुश्किल था, सो उसने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की और उसमें भी उसने मुंह की खाई। पर अब आवश्यक है कि भारत को पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई का अनुमान लगाकर व्यापक सामरिक विश्लेषण करके तैयार रहना होगा।

इस मुद्दे पर भी भारत विश्व समुदाय को यह समझाने में सफल रहा है कि उसकी कार्रवाई सिर्फ आतंकवाद के खिलाफ केंद्रित थी, जबकि पाक ने भारत की सीमा में घुसकर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना चाहा। यह बात अलहदा है कि अगले दिन फिर मात खाने के बाद पाकिस्तान के सुर नरम पड़े और वह शांति-वार्ता का प्रस्ताव लेकर आया, पर क्या भारत पाकिस्तान से चुप बैठे रहने की उम्मीद रखे? क्या भारत यह मान ले कि कश्मीर में अब आतंक का खूनी खेल थम जाएगा? पाकिस्तान की बुनियाद ही भारत के प्रति शत्रुता के धरातल पर टिकी है उसका राजनीतिक नेतृत्व अंततः आतंकियों और फौजियों के चंगुल में है। और इसलिए बालाकोट हमले से बौखलाए पाकिस्तान से फिलहाल तो चुप रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह तथ्य अपनी जगह एकदम अकाट्य है कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर इस समय बेहद दबाव में है। अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, इजराइल जैसे अनेक देश भारत के साथ खड़े हैं, लेकिन अब युध्द की आशंका गहरा रही है।

इधर भारत में कश्मीर में लागू अनुच्छेद 35-ए को समाप्त करने क लिए उच्चतम न्यायालय में दायर याचिकाओं की सुनवाई भी होनी है। धारा 370 हटाने की भी केन्द्र सरकार से अपेक्षा बढ़ी है। इन तमाम हालात के मद्देनजर भारत सरकार और सैन्य बल को कूटनीतिक व रणनीतिक मोर्चे सम्हालने हैं और पाकिस्तान को यह संदेश भी देना है कि भारत अब उसकी धूर्तता और चालबाजी में नहीं आने वाला है।

पाकिस्तान की विडंबना यह है कि उसके पास ताकत उतनी है नहीं जितनी वह जताता है। परमाणु हमले तक की धमकियां देकर पाकिस्तान ने न जाने क्या सिध्द करने की कोशिश की। पर वह याद रखे कि पाकिस्तान पर सैन्य शिकंजा कसने के लिए ईरान और अफगानिस्तान को साथ लेकर भारत यदि पाक सीमा पर एक मोर्चा बना ले तो पाकिस्तान को समूचा सैन्य समीकरण नए सिरे से साधना होगा। इससे पाकिस्तान के भीतर पनपते आतंकी ठिकानों से वहां की फौज का संरक्षण खत्म होगा। भारत के पास पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को बार-बार निशाने पर लेकर दबाव बनाने का भी विकल्प है.

पाकिस्तान दिक्कतों से घिरा है, भारत की ओर से भी और अपने हालात से भी। भारत सरकार के ‘त्रिशूल-वार’ ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है। एक तो आर्थिक मार, दूसरा विश्व समुदाय में अलग-थलग और अब सैन्य कार्रवाई । इन हालात का मुकाबला वह कैसे कर पाएगा, यह एक अहम मसला है। इधर 27 फरवरी को पाक विमानों के भारतीय सीमा में घुसने को लेकर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। प्रधानमंत्री मोदी की सेना प्रमुखों के साथ हुई अहम बैठक का संकेत है कि फिर कुछ बड़ी कार्रवाई होगी। ऐसी स्थिति में पाक की विश्व-बिरादरी में फिर किरकिरी होगी, सो अलग।

अलबत्ता, पूरे भारत में इस एयर स्ट्राइक से जश्न का माहौल है और भारत के लोग और अधिक निर्णायक कार्रवाई चाहते हैं। पर विडंबना यह है कि भारतीय सेना के इस पराक्रम को सराहने के मामले में विपक्ष के कतिपय नेताओं ने न केवल कृपणता का परिचय दिया, अपितु कुछ तो पाकिस्तानी सुर में इस समूची कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। वे इस मौके को भी अपने लिए भुनाने की कोशिशें करते हुए नजर आ रहे हैं, ट्रोल हो रहे हैं। बावजूद इसके, आतंकवाद के खिलाफ हुई इस निर्णायक कार्रवाई ने भारतीय जनमानस को एक विश्वास से भरकर नए भारत की झलक दिखला दी है।

भारतीय जनमानस मानता है कि इस हमले से भारत ने पाकिस्तान को साफ-साफ संदेश दे दिया है कि पाकिस्तान अब सुधर जाए और आंतक की फैक्ट्री बंद करे। यह नया भारत है और भारत की अस्मिता से खिलवाड़ हुआ तो भारतीय सेना उसे उसके घर में घुसकर मारेगी। भारत ने पाक में आतंकी ठिकानों को खत्म कर पाक प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ असरदार कार्रवाई की है और पाक और मसूद-हाफिज जैसे आतंकी यह समझ लें कि अब वे कुछ भी करके बच नहीं सकेंगे।