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शहर के शोरगुल से दूर जंगलों के बीच जतमई माता का बसेरा, हर साल आते हैं लाखों श्रद्धालु…

सुशील भोले छत्तीसगढ़ में अनेकों तीर्थ स्थान उपस्थित है। इनमें से एक है जतमई.. जिसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थान की राजधानी रायपुर से करीब 65 किमी की दूर जंगल के बीचों-बीच बसा हुआ है। जतमई अपने कल कल करते […]

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सुशील भोले

छत्तीसगढ़ में अनेकों तीर्थ स्थान उपस्थित है। इनमें से एक है जतमई.. जिसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों में से एक माना जाता है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थान की राजधानी रायपुर से करीब 65 किमी की दूर जंगल के बीचों-बीच बसा हुआ है।

जतमई अपने कल कल करते प्राकृतिक सदाबहार झरनों के लिए भी प्रसिद्ध है। गरियाबंद जिले में प्रकृति की गोद में बसा, वनों से आच्छादित यह अत्यंत सुंदर स्थान है, जहां हर मौसम में झरने में पानी की धारा बहती ही रहती है। लेकिन बरसात के दिनों में यह दृश्य और भी मनोरम हो जाता है। शहर के प्रदूषण से मुक्त शांत स्थान पर मां जतमाई का यह प्रसिद्ध मंदिर राज्य और बाहर के लोगों को बहुत आकर्षित करता है। इसे पहाड़ों की देवी कहा जाता है। माता के मंदिर के ठीक सटी हुई जलधाराएं उनके चरणों को छूकर चट्टानों से नीचे गिरती हैं। इसमें दर्शनार्थी डुबकी लेकर माँ का आशीर्वाद लेते हैं। स्‍थानीय मान्‍यताओं के अनुसार, ये जलधाराएं माता की सेविकाएं हैं जो देवी मां के भक्‍तों को नहलाती हैं। यहां आने वाला हर शख्स यही कहता है कि वह जन्नत में आ गया।

बहुत मशहूर है यह स्थान…

वैसे तो यहां साल भर ही भक्तों की भीड़ आती है और मां के दर्शनों का लाभ उठाती है, परंतु प्रतिवर्ष चैत्र और कुवांर के नवरात्र में मेला भी लगता है। जतमाई में दूर दूर से लोग माता के दर्शन करने आते हैं तथा पिकनिक का भी आनंद उठाते हैं। जतमई वनों के मध्य में स्थित होने के कारण एक खूबसूरत पिकनिक स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। जतमई से लगा हुआ घटारानी भी जतमई की तरह ही एक प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यहां भी जतमाई की तरह ही झरने बहते हैं और मां घटारानी का मंदिर है, जतमई के पास ही एक छोटा सा बांध भी है जिसे पर्यटक देखना नहीं भूलते।