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संपादकीय: आतंकवाद के खात्मे तक भारत चुप न बैठे

अब यह बहस जोरों पर है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन-चार दिनों में तनातनी का जो दौर चला उसमें कौन जीता और कौन हारा? दोनों तरफ की सरकारें और मीडिया अपने-अपने पक्ष में ऐसा अभियान चला रहे हैं मानो उन्होंने कोई निर्णायक लड़ाई जीत ली है। मीडिया की जंग में पुलवामा में […]

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अब यह बहस जोरों पर है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन-चार दिनों में तनातनी का जो दौर चला उसमें कौन जीता और कौन हारा? दोनों तरफ की सरकारें और मीडिया अपने-अपने पक्ष में ऐसा अभियान चला रहे हैं मानो उन्होंने कोई निर्णायक लड़ाई जीत ली है।

मीडिया की जंग में पुलवामा में जिन मांओं ने अपने सपूत खोये हैं, उनका दर्द भी भुला दिया गया है। भारत ने हवाई हमले करके पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया और सैकड़ों आतंकवादियों का खात्मा कर दिया, यह हमारी सरकार का दावा है। उधर पाकिस्तान का दावा है कि उसने दूसरे ही दिन जवाबी हमले करके न केवल भारत का एक लड़ाकू विमान गिरा दिया बल्कि अपनी क्षमता भी दिखा दी। भारत का दावा है कि हमले की फिराक में घुसे पाक विमानों को हमने न सिर्फ खदेड़ा बल्कि एक एफ 16 विमान को मार भी गिराया।

इस पूरे अभियान में एक भारतीय पायलट अभिनंदन जिसने गिरते विमान से कूदकर अपनी जान बचायी थी, दुर्भाग्य से पाकिस्तानी सेना के हाथ लग गया और शुक्रवार को उसे भारत के हवाले करके पाकिस्तान ने दुनिया को यह दिखाने की कोशिश की कि वह न सिर्फ अमन पसंद देश है बल्कि युद्ध बंदी की इज्जत करना भी जानता है। इस दरम्यान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने संसद को बताया कि उनकी सरकार शांति के मकसद से अभिनंदन को भारत के हवाले कर रही है जबकि असलियत यह है कि पाकिस्तान को अमेरिका से ही नहीं, सउदी अरब और यूएई से भी चेतावनी मिली थी कि वह भारतीय पायलट को लौटा दे।

वैसे भी जिनेवा संधि में भी युद्धबंदी को बिना क्षति लौटाने का प्रावधान है। साफ है कि पाकिस्तान ने अभिनंदन को लौटाकर कोई अहसान नहीं किया है और यदि मान भी लें कि पाकिस्तान की नई हुकूमत अब देश को अमन तथा तरक्की के रास्ते ले जाना चाहती हैं तो भी बुनियादी सवाल और समस्या की जड़ तो अपनी जगह बरकरार है। इमरान खान या पाकिस्तान सरकार ने एक बार भी नहीं माना है कि उनके देश में आतंकवादी संगठन अब भी सक्रिय हैं।

भारत सरकार ने पुलवामा हमले में जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने के सबूत पाकिस्तान को सौंपे हैं लेकिन जब पाकिस्तान आतंकवाद से जुड़े हर सवाल को नकारने के झूठ पर आमादा है तो भारतीय सबूतों पर किसी कार्यवाही की उम्मीद कैसे की जा सकती है? हालांकि भारत ने एयर स्ट्राइक करके पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया है कि आतंकी घुसपैठ और हमलों की सूरत में वह अब पाकिस्तान में घुसकर कार्यवाही करने में भी नहीं हिचकिचायेगा।

फिलहाल सवाल यह है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव अब कम होगा? जहां तक दोनों देशों की अवाम का सवाल है, जंग कोई नहीं चाहता और हर कोई जानता है कि अमन ही दोनों देशों के हित में है लेकिन पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी इंकार की मुद्रा छोडऩी होगी। हाफिज सईद, मसूद अजहर और उनके आतंकी संगठनों के लिए पूरे देश को दांव पर लगाना कौन सी बुद्धिमानी है?

भारत के लिए भी यह जरूरी है कि मसले का पूरा हल निकले बिना पीछे न हटे। पाकिस्तान में बैठे जो आतंकी सरगना कश्मीर और भारत के बाकी हिस्सों में हिंसा के लिये जिम्मेदार हैं, उनकी गर्दनों पर फंदा डालने तक भारत को चुप नहीं बैठना चाहिए। अभिनंदन की वापसी की आड़ में यदि पाकिस्तान अपने आतंकी आकाओं को बचाना चाहता है तो उसके मंसूबे पूरे नहीं होने चाहिए।