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लॉकडाउन में बेजुबान जानवरों के लिए फरिश्ता बने शहर के ये युवक, ऐसे कर रहे मदद

संदेश गुप्ता@धमतरी। देशबंदी में सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठन खूब सेवा कर रहे है। मजदूर, भिखारीयो से लेकर मुसीबत में फंसे तमाम लोगो के खाने रहने की व्यवस्था कहि न कहि से हो जा रही है। लेकिन उनका क्या जो बेजुबान है। इंसानो के दिये फेंके खाने से अपना पेट भरते हैं। जी हां हम […]

संदेश गुप्ता@धमतरी। देशबंदी में सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठन खूब सेवा कर रहे है। मजदूर, भिखारीयो से लेकर मुसीबत में फंसे तमाम लोगो के खाने रहने की व्यवस्था कहि न कहि से हो जा रही है।

लेकिन उनका क्या जो बेजुबान है। इंसानो के दिये फेंके खाने से अपना पेट भरते हैं। जी हां हम उनकी बात कर रहे हैं। जिन्हे आवारा पशु कहते हैं। धमतरी में युवाओं के एक ग्रुप ने इस दिशा में अनुकरणीय पहल की है। ये ग्रुप रोजाना खेत और जंगल से हरी घास मंगवाते हैं। मजदूर लगाकर सैकड़ों रोटीयां बनवाते हैं। फिर शहर के कोने-कोने में जाकर सैकड़ों गाय और कुत्तों का पेट भरते हैं।

लेकिन जितना कहा जा रहा है उतना आसान नहीं है। लेकिन ये ग्रुप इस काम को अपना धर्म समझता है। आपस में पैसे जोड़कर अपनी मर्जी से सहयोग करना चाहे उनका भी स्वागत करता है। इस ग्रुप ने इस पूरे काम के लिये प्रशासन से बकायदा विधिवत अनुमति ले रखी है।