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छत्तीसगढ़ की आधी आबादी वनों पर निर्भर है, वन विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अटल नगर के अरण्य भवन में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अधिकारियों वन मंडलाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक ली. बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर भी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री ने वन विभाग के मैदानी अधिकारियों की बैठक में उनसे पूछा कि वनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए क्या किया […]

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bhupesh baghel
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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज अटल नगर के अरण्य भवन में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ अधिकारियों सहित मैदानी अधिकारियों वन मंडलाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक ली. बैठक में वन मंत्री मोहम्मद अकबर भी उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के मैदानी अधिकारियों की बैठक में उनसे पूछा कि वनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए क्या किया जा रहा है ? अभी तक प्रदेश में वनोपज पर आधारित कितने लघु उद्योग स्थापित किए गए है ? वनोपज पर आधारित कौन-कौन सी औषधियां बनाई जा रही है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि कल्लू गोंद, महूआ और चरोटा बीज से और क्या-क्या उत्पाद बनाया जा सकता है? यह बताएं जाने पर कि चरोटा बीज से ऑयल बनता है जिसका उपयोग कास्मेटिक सहित अन्य उपयोग में लाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने ऐसे वन उत्पादों को बढ़ावा देने को कहा.

उन्होंने पूछा कि राज्य में नारायणपुर के समीप आंवला के कितने जंगल हैं और उसमें उत्पादन कितना उत्पादन होता है ? इनकी प्रोसेसिंग के लिए कितनी प्राईवेट कम्पनियां छत्तीसगढ़ में कार्य कर रहें है. उन्हें सुविधाएं, जमीन आदि देकर यहां उत्पादन करने के लिए बढ़ावा क्यों नहीं दिया जा रहा है?

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में बांस के जुड़े कौन-कौन से उद्योग हो सकते हैं, कहां-कहां लगाये जा सकते हैं, कहां-कहां इसकी उपलब्धता है. इस संबंध में विस्तार से मास्टर प्लान बनाने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए. यह रिपोर्ट 15 दिनों में दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने ऐसी कार्य योजना बनाने को कहा जो बेहतर परिणाम दे सके.

मुख्यमंत्री ने वनोपज पर आधारित औषधी बनाने तथा अन्य उत्पाद बनाने की कम्पनियों से टाईअप करने को कहा, जिससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिले और यहां के वनोपज के माध्यम से विभिन्न उत्पादों को निर्माण किया जा सके.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि बस्तर में बड़ी संख्या में उत्पादित होने वाली ईमली से क्या-क्या बना सकते हैं, यह बताएं जाने पर कि इसके बीज से स्टार्च भी बनता है. उन्होंने पूछा की इसके लिए छत्तीसगढ़ में प्लांट क्यों नहीं लगाया जा सकता. मुख्यमंत्री ने बस्तर के सभी वनमंडलाधिकारियों को एक माह के भीतर इसका प्लॉन बनाकर देने को कहा.

उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में हर्रा, बेहड़ा, आवला, तिखुर, हल्दी जैसे वनों उत्पाद का बड़ी संख्या में नैसर्गिक एवं प्राकृतिक वातावरण में जैविक रूप से उत्पादन होता है. इनका देश के राजधानी दिल्ली सहित अन्य स्थानों में प्रचारित एवं प्रसारित कर मार्केटिंग करने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि नदी किनारे किए जाने वाले पौध रोपण के लिए कौन-कौन से पौधे उपयुक्त होंगे। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए अर्जुन, कहवा, जामुन, कटहल, आम, अमरूद आदि अच्छे पौधे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के नदी के करीब किए जाने वाले पौध रोपण के कार्य को ऐसे करें जिससे बाद में ये क्षेत्र खुबसूरत और रमणीक बनें साथ ही यहां फलदार पौधे भी लगाएं जिससे गांव के लोग उसकी सुरक्षा करें और वहां की आमदनी बढ़े साथ ही लोगों को रोजगार मिले.

मुख्यमंत्री ने पूछा कि राज्य में बिगड़े वनों की संख्या कितनी है ? उन्होंने कहा प्रदेश में बारनावापारा आदि के जंगलों में बड़ी संख्या में बांस का उत्पादन होता है, लेकिन उनका समुचित दोहन नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा छत्तीसगढ़ में फर्निचर, अलमारी निर्माण जैसे कार्यो में स्टील का बहुतायत से उपयोग होता है. हमारे वनों में उत्पादित वनों में बांस और इमारती लकड़ियों का उपयोग इसके लिए बेहतर रूप से किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जंगलों के किनारे बसे शहरोें में वनोपजों पर आधारित उद्योगों लगाएं जाने के प्रयास किए जाने चाहिए और इसके लिए सहकारी समितियों के द्वारा प्रसंस्करण यूनिट लगाएं जाने पर जोेर दिया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि अविभाजित एवं छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब प्रदेश के मुखिया द्वारा विशेष रूप से सिर्फ वन विभाग के वन मंडलाधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर कार्यों की समीक्षा की जाएगी. बैठक में मुख्यमंत्री ने वन अधिकारियों से कहा कि वे छत्तीसगढ़ भाषा सहित स्थानीय भाषा और बोलियों से न केवल अवगत रहें बल्कि उसे समझे और बोल चाल के लिए भी उपयोग में लाएं.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य का 44.2 प्रतिशत क्षेत्र वनों से अच्छादित है. आदिवासी बहुल राज्य की लगभग 98 प्रतिशत आदिम जातियों की आबादी वनों एवं इसके आसपास निवासरत है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में नये सरकार द्वारा वनवासियों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं. तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर ढाई हजार से बढ़ाकर चार हजार रूपए प्रति मानक बोरा किया गया है. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किए जाने वाले वनोपजों की संख्या 7 से बढ़ाकर 15 की गई है. नरवा, गरूवा, घुरवा, बारी योजना के क्रियान्वयन के लिए भी वन विभाग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है.

बैठक में नदी तटरोपण और वनोपज आधारित उद्योगों की स्थापना, हरियर छत्तीसगढ़, हरियाली प्रसार योजना, आगामी वर्षा ऋतु में पौधरोपण जैसे कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी. इसके अलावा वनों में अग्नि सुरक्षा हेतु सेटेलाइट आधारित मॉनिटरिंग तकनीक, 7887 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से किए जा रहे ग्राम विकास के कार्यों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा.

मुख्यमंत्री द्वारा वन विभाग की विशेष रूप से समीक्षा करना तथा वन सम्पदा को बढ़ावा देने के लिए समय दिया जाना इस बात को इंगित करता है कि छत्तीसगढ़ राज्य की आधी आबादी जो अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वनों पर निर्भर है, के विकास के लिए मुख्यमंत्री द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है.