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Good News! देश में पहली बार पुरुषों से अधिक महिलाओं की आबादी, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में खुलासा

नई दिल्ली।  (Good News) कभी मिसिंग वूमन का तोहमत झेलने वाले देश के लिए बड़ी खुशखबरी है सामने आई है।, देश में अब 1,000 पुरुषों की तुलना में महिलाओं की आबादी 1,020 हो गई है। मिसिंग वूमन’ (Missing Women) शब्द का इस्तेमाल पहली बार नोबेल प्राइस विजेता र्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने 1990 में एक लेख में की थी। बता दें कि 2011 की जनगणना में पुरुष और महिलाओं की आबादी में काफी सुधार दर्ज किया गया है। इसके बाद से स्थिति भारत में काफी अच्छी हुई है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या बढ़ी है.

बता दें कि 1990 के दौरान भारत में प्रति हजार पुरुषों की तुलना में महिलाओं का अनुपात 927 था। 2005-06 में यह आंकड़ा 1000-1000 तक आ गया। हालांकि, 2015-16 में यह घटकर 1000 हजार पुरुषों की तुलना में 991 पहुंच गया था (Good News) लेकिन इस बार ये आंकड़ा 1000 से 1,020 तक पहुंच गया है।

NFHS-5 का सर्वे यूं किया गया

NFHS का 2019 और 2021 यानी की दो चरणों में पूरा हुआ। देश के 707 जिलों के 6,50,000 घरों में ये सर्वे किया गया। (Good News) दूसरे चरण का सर्वे अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, ओडिशा, पुड्डुचेरी, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में किया गया।

प्रजनन दर घटी, जनसंख्या में आएगी कमी?

प्रजनन दर घटने का असर देश की आबादी घटने में दिखेगा यहा नहीं, इसका पता तो अगली जनलगणना (National Census) में ही पता चलेगा। NFHS के पांचवें राउंड के सर्वे में 2010-14 के दौरान पुरुषों में जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) 66.4 साल है जबकि महिलाओं में 69.6 साल।

23 राज्यों में महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक

देश के 23 राज्य ऐसे हैं जहां प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की आबादी 1,000 से ज्यादा है. उत्तर प्रदेश में प्रति हजार पुरुषों पर 1017, बिहार में 1090, दिल्ली में 913, मध्य प्रदेश में 970, राजस्थान में 1009, छत्तीसगढ़ में 1015, महाराष्ट्र में 966, पंजाब में 938, हरियाणा में 926, झारखंड में 1050 महिलाएं हैं.

जनसंख्या

इस खंड में, हम जनसंख्या से संबंधित कुछ संकेतकों को देखते हैं: (i) परिवार नियोजन विधियों का उपयोग (महिला या पुरुष नसबंदी, और गर्भ निरोधकों का उपयोग), (ii) कुल प्रजनन दर (TFR), और (iii) लिंग अनुपात जन्म पर। TFR अपने जीवनकाल में एक महिला से पैदा हुए बच्चों की औसत संख्या है। जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से सरकारें टीएफआर के लिए लक्ष्य निर्धारित करती हैं। 2.1 के टीएफआर को प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन दर के रूप में माना जाता है जिस पर जनसंख्या स्थिरता हासिल की जाती है (यानी, जनसंख्या खुद को बदल देती है)। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति, 2000 ने वर्ष 2010 तक प्रतिस्थापन स्तर की प्रजनन क्षमता हासिल करने की मांग की थी।

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