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गांधी विचार यात्रा 146 ब्लाकों में हुयी संपन्न, 11 से 17 अक्टूबर तक प्रदेश भर चला पदयात्रा का कार्यक्रम

रायपुर। गांधी विचार पदयात्रा 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी 298 ब्लाकों में पदयात्रा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पदयात्रा में शामिल सभी पदयात्रियों ने 3600 किमी की दूरी पदयात्रा कर 15000 से अधिक गांवों में पहुंच कर तय की। गांधी के विचारों, आदर्शो एवं उनके द्वारा चलाये गये कार्यक्रमों को जन-जन तक […]

रायपुर। गांधी विचार पदयात्रा 11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी 298 ब्लाकों में पदयात्रा का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। पदयात्रा में शामिल सभी पदयात्रियों ने 3600 किमी की दूरी पदयात्रा कर 15000 से अधिक गांवों में पहुंच कर तय की। गांधी के विचारों, आदर्शो एवं उनके द्वारा चलाये गये कार्यक्रमों को जन-जन तक हमारे कार्यकर्ता लेकर गये। रघुपति राघव राजा राम पतित पावन सीताराम सबको सम्मति दे भगवान की गूंज से गांव-गांव तक गांधी विचारों का संदेश पहुंचाने का कार्य कार्यकर्ताओं ने किया।

4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक कंडेल से गांधी मैदान रायपुर तक पदयात्रा का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। मुख्यमेत्री भूपेश बघेल 4 अक्टूबर को कंडेल धमतरी में पदयात्रा का शुभारंभ किया एवं समापन गांधी मैदान में किया, लगभग 74 किमी की पदयात्रा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कांग्रेसजनों के साथ पूरी की। कंडेल से गांधी मैदान तक गांधी विचार यात्रा कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के साथ प्रतिदिन कोई न कोई केबिनेट मंत्री और विधायकगण, कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारियों, जिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

पदयात्रा के माध्यम से महात्मा गांधी के विचारों के पाम्पलेट, राज्य सरकार की 9 माह की उपलब्धियां कांग्रेस पार्टी की विचारधारा एवं समग्र विकास की अवधारणा लेकर चलने वाली, राज्य सरकार की एवं कांग्रेस पार्टी के इतिहास से आमजन को जोड़ने का काम किया गया।

11 अक्टूबर से 17 अक्टूबर तक की पदयात्रा में गांव के साथ-साथ शहरों में भी कांग्रेसजनों ने आम लोगों तक पहुंच कर गांधी संदेश पहुंचाने का पवित्र काम किया। जगह-जगह नुक्कड़ सभा, आम सभा, घर-घर जनसंपर्क किया और गांधी के आदर्शो और विचारों से नई पीढ़ी के नौजवानों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम किया। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भी यात्रा से स्वयं जुड़ते जाते थे और एक गांव से दूसरे गांव, एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक यात्रा को आगे पहुंचाया जाता था। यह क्रम लगातार 7 दिनों तक प्रदेश के सभी 146 ब्लाकों में अनवरत चलता रहा।