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जशपुर में भी बनेगा रायपुर तर्ज पर गढ़कलेवा, हस्तशिल्प और वनोत्पाद के प्रदर्शन व विक्रय का केन्द्र

जशपुरनगर। जशपुरनगर में कलेक्टोरेट से लगे वन विभाग के माहुल दोना पत्तल निर्माण व विक्रय केन्द्र को गढ़कलेवा और जंगल बाजार के रूप में विकसित किया जाएगा। रायपुर की तर्ज पर जशपुरिया गढ़कलेवा बनेगा। यहां जशपुरिया व्यंजन जैसे धुसका, कचरी, बड़ा, चिलका रोटी, पीठा रोटी, खपरा रोटी, पुआ रोटी, अईरसा रोटी, धुकड़ी लड्डू, मुरही लड्डू, […]

जशपुरनगर। जशपुरनगर में कलेक्टोरेट से लगे वन विभाग के माहुल दोना पत्तल निर्माण व विक्रय केन्द्र को गढ़कलेवा और जंगल बाजार के रूप में विकसित किया जाएगा। रायपुर की तर्ज पर जशपुरिया गढ़कलेवा बनेगा। यहां जशपुरिया व्यंजन जैसे धुसका, कचरी, बड़ा, चिलका रोटी, पीठा रोटी, खपरा रोटी, पुआ रोटी, अईरसा रोटी, धुकड़ी लड्डू, मुरही लड्डू, बालूशाही आदि के जायके का लोग लुप्त उठा सकेंगे। 

गढ़कलेवा के एक हिस्से में जंगल बाजार भी विकसित किया जाएगा। जंगल बाजार में जशपुर के विभिन्न कलाओं के शिल्पियों द्वारा निर्मित सामग्री का प्रदर्शन एवं विक्रय भी होगा। 

जिला प्रशासन एवं वनविभाग के संयुक्त प्रयास से गढ़कलेवा एवं जंगल बाजार विकसित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर एवं वनमण्डलाधिकारी श्री कृष्ण जाधव ने मंगलवार को मौका-मुआयना किया और गढ़कलेवा एवं जंगलबाजार के निर्माण के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए। वन विभाग द्वारा जशपुर के वनोत्पाद एवं हस्तशिल्प को मार्केट उपलब्ध कराने तथा स्थानीय शिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 20 लाख रुपए की लागत से जंगल बाजार के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। जिला प्रशासन डीएमएफ एवं अन्य मद से यहां गढ़कलेवा का निर्माण जशपुर के ग्रामीण परिवेश को ध्यान में रखते हुए कराया जाएगा। गढ़कलेवा की लोकेशन मुख्यमार्ग के किनारे तथा शहर के मध्य है। यह कलेक्टोरेट, जिला न्यायालय, जिला पंचायत, तहसील कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों से भी लगा हुआ है। शासकीय काम-काज के सिलसिले में रोज जिले के दूरदराज से बड़ी संख्या में आने वाले लोगां को गढ़कलेवा में जशपुरिया केलवा (स्वलपाहार) और भोजन मिल सकेगा।