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Dhamtari: ये कैसा व्यवहार!  सेनानियों की तीन पीढ़िया गुजर गई, 62 साल भी सम्मान को तरस रहा इनका परिवार

संदेश गुप्ता@धमतरी। जिले(Dhamtari)का उमरगांव जहां 45 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुए। आज ये गांव और सेनानियों के वंशज 62 साल से शासन- प्रशासन की उपेक्षा झेल रहे हैं। अपने पूर्वजों के बलिदान के बदले में सम्मान की मांग करते-करते तीन पीढ़ियां बदल गई। उमरगांव के फरियाद (Dhamtari)की उम्र बढ़ती ही जा रही है। corona: सुकून भरी […]

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संदेश गुप्ता@धमतरी। जिले(Dhamtari)का उमरगांव जहां 45 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हुए। आज ये गांव और सेनानियों के वंशज 62 साल से शासन- प्रशासन की उपेक्षा झेल रहे हैं।

अपने पूर्वजों के बलिदान के बदले में सम्मान की मांग करते-करते तीन पीढ़ियां बदल गई।

उमरगांव के फरियाद (Dhamtari)की उम्र बढ़ती ही जा रही है।

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इधर मांग पूरी होना तो दूर आज ये लोग मजदूरी कर के जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

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तहसील का उमर गांव शायद ये छत्तीसगढ़ का इकलौता गांव होगा।

जहां एक साथ 45 स्वतंत्रता(Dhamtari) संग्राम सेनानी हुए।

जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लिया, जेल गए और आजादी के ऐसे भी दीवाने हुए।

जिन्होंने 1947 में आजादी की खबर पाते ही जंगल में तिरंगा फहरा दिया।

तब अंग्रेजो ने इन्हें तिरंगा फहराने की सजा के तौर पर बेंत से मारा था।

लेकिन वो बेंत खाकर भी वंदे मातरम का नारा लगाते रहे।

अब सेनानियों के वंशज चाहते हैं कि गांव के स्कूल का नाम, अस्पताल का नाम उन पूर्वजों के नाम पर रखा जाए।

देश के लिये बलिदान दिया।

दूसरी मांग यह है कि इस गांव को गौरव ग्राम घोषित किया जाए।

तीसरी मांग इस गांव में सेनानियों के नाम का स्मारक बनाया जाए।

चौथी मांग एक स्वागत द्वार बनाया जाए।

ये छोटी-छोटी मांग आज से नहीं बल्कि बीते 62 साल से की जा रही है।

लेकिन  विधायक सांसद से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक मौखिक और दस्तावेजों तौर पर बात रखी जा चुकी है।

लेकिन आज तक शासन-प्रशासन के काम में जूं तक नहीं रेंगी।

सेनानियों के वंशज तंज कसते हैं।

सवाल उठाते है कि मजह पांच साल में कैसे मंत्रियों के एअर कंडिशन बंगले बन जाते हैं।

सेनानियों के बच्चे गरीबी के गर्त से बाहर नहीं निकल पाते।

एक तीखा तंज यह भी है कि बासी चटनी खाने वालो को जब लजीज पकवान मिलने लगता है।

तब वो अपनो को भूल जाते हैं।

जिनकी बदौलत लोग आज आजाद भारत में विधायक, सांसद और मंत्री बने।

लाल बत्ती में वीआईपी दर्जे में रहते हैं।

उनके आगे अपनी छटाक भर मांग के लिये नाक रगड़ते-रगड़ते इन्हे हर बार आश्वासन और फिर धोखा ही मिला है।

इन्हे अब अपमान की इतनी आदत सी पड़ गई है कि ये लोग उसमें भी हास्य का पुट निकाल लेते हैं।

आज गांव के 45 सेनानियों का परिवार बुरे हाल में हैं।

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जीने के लिये छोटी मोटी खेती है या फिर रोजी मजदूरी का रास्ता है।

सारे गांव के लोग चाहते है कि इन परिवारो का सरकार ध्यान रखें।

देश में 60 साल तक राज  करने वाली कांग्रेस फिर सत्ता में हैं।

लेकिन धमतरी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि अभी सत्ता मे आए थोड़ा ही समय हुआ हैं।

पांच साल के अंदर उमरगांव की सभी मांगे पूरी करेंगे।

तो जिलाधीश रजत बंसल भी कह रहे है कि मामला अभी संज्ञान में आया है।

अगर नेता जी और जिला प्रशासन की माने तो बीते 62 साल में जो मांगे रखी गई। वो कचरे के डब्बे में डाल दी गई।