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भ्रष्टाचार भाजपा राज का, लीपापोती कांग्रेस की: माकपा

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ की टॉप ब्यूरोक्रेसी द्वारा किये गए 1000 करोड़ रुपयों के प्रथम दृष्टया पुष्ट भ्रष्टाचार के मामले में हाइकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत किया है तथा मांग की है कि आरोपित अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से निलंबित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाये। आज जारी एक बयान […]

भ्रष्टाचार भाजपा राज का, लीपापोती कांग्रेस की: माकपा

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छत्तीसगढ़ की टॉप ब्यूरोक्रेसी द्वारा किये गए 1000 करोड़ रुपयों के प्रथम दृष्टया पुष्ट भ्रष्टाचार के मामले में हाइकोर्ट द्वारा सीबीआई जांच के आदेश का स्वागत किया है तथा मांग की है कि आरोपित अधिकारियों को उनके वर्तमान पदों से निलंबित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाये।

आज जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि कांग्रेस सरकार द्वारा इस भ्रष्टाचार की अनदेखी करने के बाद ही हाईकोर्ट को सीबीआई जांच का आदेश देना पड़ा है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 21 में स्पष्ट रूप से कहा है कि राज्य सरकार द्वारा कुछ वित्तीय अनियमितताओं को स्वीकार करने के बावजूद मामले की छानबीन करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किये गए हैं और सार्वजनिक फंड का इतने बड़े पैमाने पर दुरूपयोग होने पर भी बिना कोई अपराध पंजीबद्ध किये विभागीय कार्यवाही के लिए कुछ नोटिस भेजकर ही इतिश्री कर ली है। यह स्पष्ट रूप से कांग्रेस सरकार के खिलाफ भी टिप्पणी है, जिसने पूरे मामले की लीपापोती करने की कोशिश की है। इसके पूर्व कल्लूरी मामले में भी इस सरकार की छवि धूमिल हुई है। इन भ्रष्टाचारियों के साथ मिलीभगत का प्रमाण इससे ही मिलता है कि इन पर कार्यवाही करने के बजाए इन्हें पदोन्नति दे दी गई गई। माकपा ने कहा है कि कांग्रेस सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की अपनी घोषित प्रतिबद्धता को करनी में उतारना होगा।

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा कि भ्रष्टाचार का आलम यह है कि इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के जज को भी नहीं छोड़ा है और जज अल्तमस कबीर के छत्तीसगढ़ दौरे पर वाहन किराए के फर्जी बिल तक बनाये है, जिसका उल्लेख हाई कोर्ट ने अपने आदेश के पैरा 11 में किया है। पार्टी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को भी इस भ्रष्टाचार का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट को आरोपितों की याचिका को खारिज करना चाहिए। माकपा ने कहा है कि आरोपितों के रसूख और राज्य सरकार की इन अधिकारियों को बचाने की कोशिशों के मद्देनजर सीबीआई जांच हाई कोर्ट की देखरेख में होनी चाहिए।