राजनीति

Congress statement: मोदी निर्मित है छत्तीसगढ़ में रासायनिक खाद का संकट, भेदभाव पूर्ण रवैया के चलते किसान परेशान: शैलेश नितिन त्रिवेदी

रायपुर।  (Congress statement) प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने छत्तीसगढ़ के खाद संकट के लिये मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि मोदी सरकार किसानों, गरीबों और मजदूरों की नहीं, बल्कि पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों की हितैषी है। इसका सबसे बड़ा सबूत है किसानों को कार्पोरेट घरानों और पूंजीपतियों का गुलाम बनाने के लिए कृषि के क्षेत्र में तीन नए कृषि कानून बनाया गया। तीनों कृषि कानून कार्पोरेट घरानों और पूंजीपतियों के हित को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं। जिसके चलते जमाखोरी, मुनाफाखोरी को बढ़ावा कानून संरक्षण मिलेगा। (Congress statement) नए कृषि कानूनों के माध्यम से कॉन्टेक्ट फार्मिंग का प्रावधान करके मोदी सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की तैयारी की है। (Congress statement) इसका विरोध पूरे देश के किसान कर रहे हैं। देश की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर इलाकों में किसान कई महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केन्द्र सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। केन्द्र सरकार, देश के अन्नदाता किसान भाईयों के दुख-दर्द और उनकी पीड़ा को समझने के बजाय उनके विरोध को कुचलने का लगातार प्रयास कर रही है। सरकार का यह कृत्य इस बात को प्रमाणित करता है कि किसान, गरीब, मजदूर उसके लिए कोई मायने नहीं रखते। वह पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों की मदद से सत्ता में बने रहना चाहती है।

officer arrested: क्रीडा अधिकारी की अश्लीलता, शिक्षिका को अश्लील तस्वीरें भेजने पर कार्रवाई, बसंतपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार, आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य है। खरीफ की खेती छत्तीसगढ़ राज्य के किसानों के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। राज्य के अधिकांश किसानों के जीवन यापन का आधार खरीफ की पैदावार ही है। केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। किसानों के हित में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों में अडं़गा लगाना केन्द्र सरकार का शगल बन गया है। चाहे वह धान खरीदी का मामला हो या रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति का। केन्द्र सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के साथ लगातार भेदभाव कर रही है।  खरीफ सीजन 2021 के लिए छत्तीसगढ़ राज्य को 11 लाख 75 हजार मेट्रिक टन रासायनिक उर्वरक की जरूरत है। केन्द्र सरकार से उक्त मात्रा में रासायनिक की आपूर्ति की डिमांड छत्तीसगढ़ की ओर से की गई थी, परंतु 13 जुलाई 2021 की स्थिति में केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र 6 लाख एक हजार मेट्रिक टन रासायनिक खाद दी गई है, जो कि हमारी मांग का मात्र 51 प्रतिशत है। 13 जुलाई की स्थिति खरीफ सीजन 2018 में मांग के विरूद्ध 55 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2019 में केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य को मांग के विरूद्ध 61 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2020 में 64 प्रतिशत खाद की आपूर्ति की गई थी, जबकि चालू खरीफ सीजन में मात्र 51 प्रतिशत की आपूर्ति की गई है।

young man’s body found: ट्रैक्टर की टाली में मिला युवक का शव, खेत जाने को निकला था, खेत में मिली लाश, एडिशनल एसपी व डॉग स्क्वायड की टीम के साथ मौके पर पहुंची

यही वजह है कि छत्तीसगढ़ राज्य में रासायनिक उर्वरकों को लेकर किल्लत हो रही है। छत्तीसगढ़ राज्य को मांग के अनुरूप रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में खेती-किसानी को लेकर संकट पैदा हो गया है। खरीफ फसलों की बुआई के समय में खाद की जरूरत किसानों को ज्यादा होती है। वर्तमान समय में खरीफ फसलों की बुआई की जा रही है। ऐसी स्थिति में राज्य की मांग के अनुरूप रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति में कमी करना, केन्द्र सरकार के भेदभाव को दर्शाता है। खरीफ 2021 सीजन के लिए केन्द्र सरकार को 11.75 लाख मेट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति की डिमांड भेजी गई थी, जिसमें यूरिया की मात्रा 5.50 लाख टन, डीएपी 3.20 लाख टन, एनपीके 80 हजार मेट्रिक टन, एमओपी 75 हजार मेट्रिक टन, सिंगल सुपरफॉस्फेट 1.50 लाख मेट्रिक टन शामिल है। 13 जुलाई 2021 की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य को 5.50 लाख टन यूरिया की मांग के विरूद्ध 2.67 लाख मेट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति की गई है, जो मात्र 49 प्रतिशत है। इसी तरह डीएपी खाद की 3.20 लाख मेट्रिक टन मांग के विरूद्ध अब तक 1.55 लाख टन खाद प्रदाय की गई है, जो कि मांग का मात्र 48 प्रतिशत है। एनपीके उर्वरक की 80 हजार मेट्रिक टन की मांग के बदले अब तक छत्तीसगढ़ राज्य को मात्र 52 हजार मेट्रिक टन उर्वरक की आपूर्ति हुई है, जो कि मांग का मात्र 65 प्रतिशत है।  छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा एमओपी उर्वरक 75 हजार मेट्रिक टन की मांग के विरूद्ध अब तक 74  हजार मेट्रिक टन की आपूर्ति की गई है, जो कि मांग का 73 प्रतिशत सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक की छत्तीसगढ़ राज्य को 1.50 लाख मेट्रिक टन की जरूरत है।

13 जुलाई 2021 की स्थिति में मात्र 72 हजार मेट्रिक टन उर्वरक प्राप्त हुई है, जो मांग का मात्र 48 प्रतिशत है। इस प्रकार देखा जाए तो छत्तीसगढ़ राज्य को 13 जुलाई की स्थिति में मात्र 6 लाख एक हजार टन सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति हुई है, जो कि हमारी कुल मांग का मात्र 51 प्रतिशत है।

 रासायनिक उर्वरकों की आपूर्ति में कमी के चलते राज्य में खाद का संकट बना हुआ है। इस साल खरीफ सीजन के लिए राज्य को अब तक प्राप्त रासायनिक उर्वरकों की मात्रा बीते 6 सालों में मिले रासायनिक उर्वरकों की मात्रा की तुलना में लगभग आधी है।

  खरीफ सीजन 2015 में उर्वरक प्रदायक कम्पनियों द्वारा राज्य की डिमांड 11 लाख मेट्रिक टन के विरुद्ध 9.81 लाख मेट्रिक टन उर्वरकों की आपूर्ति की गई थी, जो कि डिमांड का 89 प्रतिशत थी। इसी तरह खरीफ 2016 सीजन में 10.40 लाख मेट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों की डिमांड के 8.25 लाख मेट्रिक टन उर्वरक प्रदाय किया गया था, जो डिमांड का 79 प्रतिशत था। खरीफ सीजन 2017 में उर्वरकों की मांग का 72 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2018 मांग का 73 प्रतिशत, खरीफ सीजन 2019 में मांग का 80 प्रतिशत तथा खरीफ सीजन 2020 में 11.30 लाख मेट्रिक टन की मांग के विरूद्ध छत्तीसगढ़ राज्य को 10.04 लाख मेट्रिक टन उर्वरक मिला था, जो कि मांग का 89 प्रतिशत था।

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: