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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जन्मदिन विशेष: कई बड़ी जिम्मेदारियों का किया निर्वहन, संघर्ष से भरा रहा इनका जीवन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल यानी 23 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाएंगे। उनका जन्म दुर्ग जिले के ग्राम बेलौदी में हुआ, उन्होंने रायपुर के साइंस कॉलेज में अपनी शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरूवात की। 2018 में हुए विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने 90 […]

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जन्मदिन विशेष: कई बड़ी जिम्मेदारियों का किया निर्वहन, संघर्ष से भरा रहा इनका जीवन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कल यानी 23 अगस्त को अपना जन्मदिन मनाएंगे। उनका जन्म दुर्ग जिले के ग्राम बेलौदी में हुआ, उन्होंने रायपुर के साइंस कॉलेज में अपनी शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरूवात की।

2018 में हुए विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। जिन तीन राज्यों में कांग्रेस को जीत हासिल हुई, उनमें से छत्तीसगढ़ तीन चौथाई सीटें जीतकर सबसे आगे रहा। इस जीत के बाद भूपेश बघेल ने 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

सबसे खास बात यह रही कि शपथ लेने के डेढ़ घंटे के भीतर ही उन्होंने 16.65 लाख किसानों की 6100 करोड़ राशि की कर्ज़माफी के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए और जता दिया कि वे चुनाव के दौरान किए अपने वादे को अमली जामा पहनाने के प्रति बेहद संवेदनशील और गंभीर हैं। जिसके बाद उन्होंने तनऱ्य सलया कक ककसानों से धान 2500 रु प्रति क्विंटल दर से ख़रीदी किया जाएगा। 10 दिनों के भीतर किसानों के कर्ज की राशि उनके खातों में पहुंचने भी लगी।

उन्होंने एक बड़ा संवेदनशील निर्णय लिया और बस्तर के लोहंडीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापस लौटाने का निर्णय लिया जमीन लगाने के लिए उनसे ले गई थी लेकिन नहीं लगने के बावजूद जमीन उन्हें लौटाई नहीं गई थी। उन्होंने तेंदूपत्ता मजदूरों का मेहनताना 2500 प्रति बोरी से बढ़ाकर 4000 करने का निर्णय लिया। उन्होंने पूरे प्रदेश में छोटे भूखंडों की खरीदी बिक्री पर लगी रोक को हटाने का निर्णय लिया और लाखों लोगों को राहत दी। वादे अनुरूप उन्होंने कॉलेजों में सहायता प्रधापकों की भर्ती शुरू की और संविदा कर्मियों की जगह नियमित कर्मचारियों की भर्ती के आदेश दिए।

न्याय दिलाने के क्रम में उन्होंने झीरम हमले और नान घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया और जांच शुरू करवा दी। लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की घोषणा की जिसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया जो पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून बनाएगा।

कुल मिलाकर डेढ़ महीने में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली सरकार ने साबित कर दिया कि निर्णय लेने वाली और जनहित के लिए प्रतिबद्ध सरकार कैसी होती है। भूपेश बघेल की पहचान मुखर आवाज और तीखे तेवर के साथ सीधी लड़ाई लड़ने वाले राजनेता की है सामाजिक सरोकारों के साथ आमजन के मुद्दों पर संघर्ष के लिए जाने जाते हैं । हालांकि उनका राजनीतिक जीवन बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा लेकिन उनकी लोकप्रियता उन्हें जन नेता के रूप में स्थापित करती चली गई।

10 वर्ष की छोटी सी उम्र से ही कृषि कार्यों से जुड़े बघेल खेती-किसानी की हर बारीकियों को एक किसान की तरह समझते हैं और किसानों की हर पीड़ा से भलीभांति परिचित हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपनी राजनीति युवक कांग्रेस से शुरू कि उसी समय से उन्होंने अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं की स्पष्ट पहचान कर ली थी। 1992 में बाबरी मस्जिद जाने के बाद उन्होंने युवा कांग्रेस के साथियों के साथ दुर्ग जिले में 350 किलोमीटर की संभावना पदयात्रा की थी। 32 वर्ष की उम्र में अविभाजित मध्यप्रदेश के विधानसभा में पहुंचने वाले राजनेता बनने के साथियों ने विधानसभा सदस्य के रूप में अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली।

जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी राज्य सरकार में मंत्री के रूप में अपनी पारी की शुरुआत मुख्यमंत्री से संबद्ध मंत्री के रूप में की फिर उन्हें परिवहन मंत्री का प्रभार मिला और साथ में मध्य प्रदेश परिवहन निगम के अध्यक्ष का पद भी.. 6 महीने के अल्पावधि में निगम को घाटे की गहरी घाटी से निकालकर लाभकारी निगम की श्रेणी में ला खड़ा किया। वर्ष 2000 में नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य में भी उन्हें अनेक महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली।

सूखाग्रस्त राज्य में राजस्व एवं राहत कार्य पुनर्वास लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जैसे विभागों की जिम्मेदारियां संभालते हुए उन्होंने सूखा पीड़ित जनता को राहत देने में उल्लेखनीय भूमिका का निर्वाह किया। वर्ष 2003 से 2018 तक लगातार विपक्ष के नेता के रूप में काम करते रहे। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने सदन के भीतर भी अपनी दमदार छवि स्थापित की, वर्ष 2003 से 2008 के बीच में विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भी रहे। छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस पार्टी की पराजय के पश्चात बघेल को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेश में जन आंदोलनों के माध्यम से जन-जन के मुद्दों पर निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया और अपने पिता के साथ इस लड़ाई को शिखर तक ले गए इस बीच उन्होंने किसानों आदिवासियों अनुसूचित जाति के लोगों चिटफंड कंपनियों के पीड़ितों महिलाओं बेरोजगारों सभी के बीच जाकर संघर्ष किया और कई बार सरकार को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य किया।

महात्मा गांधी से प्रेरित होकर उन्होंने पदयात्रा को अपनी राजनीति का जरिया बनाया और पिछले 5 वर्षों में लगभग 1000 किलोमीटर की पदयात्रा की जिसकी वजह से पिछले 5 वर्षों में पौने 3 लाख किलोमीटर की सड़क यात्रा भी की। बघेल ने अपने राजनीतिक संघर्ष को छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़ा और छत्तीसगढ़ के चार धारी नरवा गरवा घुरवा बारी का नारा दिया इस नारे के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता को संदेश दिया कि वे राज्य में ग्रामीण विकास को विकास की दूरी बनाना चाहते हैं और मानते हैं कि छत्तीसगढ़ की छवि इसी रास्ते से बदले कि उन्होंने प्रदेश में औद्योगिक व्यवसायिक विकास का रोड मैप जनता के सामने रखा। कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी घोषणापत्र में झलक मिलती है। अपने लोक अभियानों के दौरान अनेक बार जेल भी गए लेकिन वे अपने पद से डिगे नहीं बल्कि नहीं जीत और जुनून के साथ अपने संकल्प को अंजाम पर पहुंचाने के लिए संघर्षरत रहे।

इस तरह 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे बड़ी जीत मिली है कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में लौटी छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में किसी भी दल को सर्वाधिक वोट मिलने का कीर्तिमान बना। दो तिहाई बहुमत से सरकार बन सकती है लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 3 चौथाई से अधिक का प्रचंड बहुमत मिला।