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राजस्थान में घूंघट प्रथा को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताया बेतुका, चलाना चाहिए अभियान

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के कई हिस्सों में मौजूदा घूंघट प्रथा की आलोचना करते हुए कहा कि यह बेतुकी है और इसके खिलाफ अभियान चलना चाहिए। गहलोत बुधवार को अपने निवास पर आयोजित शबद-कीर्तन के अवसर पर उपस्थित जन समूह को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा,‘ आप देखते हैं राजस्थान जैसे प्रदेश […]

जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के कई हिस्सों में मौजूदा घूंघट प्रथा की आलोचना करते हुए कहा कि यह बेतुकी है और इसके खिलाफ अभियान चलना चाहिए।

गहलोत बुधवार को अपने निवास पर आयोजित शबद-कीर्तन के अवसर पर उपस्थित जन समूह को संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने कहा,‘ आप देखते हैं राजस्थान जैसे प्रदेश में घूंघट प्रथा है। एक महिला को आप घूंघट में कैद रखो यह कहां की समझदारी है?’ 

उन्होंने कहा,‘हिंदुस्तान के अधिकांश राज्यों में यह प्रथा नहीं है। राजस्थान में प्रथा है कहीं-कहीं पर और छोटी-मोटी प्रथाएं है तो मेरा मानना है कि समय आ गया है कि घूंघट हटाओ का अभियान चलना चाहिए। प्रदेश, देश की महिलाओं को आगे आना चाहिए और महिलाओं से ज्यादा पुरुष को आगे आना चाहिए।’ 

गहलोत ने कहा,‘ घूंघट हो या बुर्का हो … आधुनिक समाज में, दुनिया चांद तक पहुंच रही है, मंगल ग्रह पर जा रही है … तो (इसका) क्या तुक है।’ 

उन्होंने कहा कि गुरुनानक देव ने उस जमाने में महिलाओं के सशक्तिकरण की बात की, जो हमें संदेश देता है कि किस प्रकार से हम सब मिलकर उनकी सोच को आगे बढ़ाएं।

उन्होंने बताया कि सिख समाज में रीति रिवाजों से हुई शादियों के रजिस्ट्रेशन के उद्देश्य से मैंने राजस्थान आनंद मैरिज रजिस्ट्रेशन नियम 2019 के प्रारूप का अनुमोदन कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न प्रतियोगी तथा शैक्षणिक परीक्षाओं में बैठने वाले सिख धर्म के अभ्यर्थियों को कड़ा, कृपाण व पगड़ी आदि धार्मिक प्रतीक धारण करने की छूट होगी। इसके लिए दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।