Home जिले जशपुर जिंदगी की जंग हार गया कृष, ब्लड कैंसर ने नहीं असंवेदनशील सिस्टम...

जिंदगी की जंग हार गया कृष, ब्लड कैंसर ने नहीं असंवेदनशील सिस्टम ने ली जान

जशपुर. बगीचा ब्लॉक के निवासी नंदकिशोर सोनी के सुपुत्र कृष ने आज सुबह 7:00 बजे बाल्को कैंसर अस्पताल नवा रायपुर में अंतिम सांस ली। 13 वर्षीय मासूम कृष को ब्लड कैंसर था। पिछले 1 हफ्ते से वह जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा था। इस लड़ाई में उसके माता पिता आर्थिक तंगी से सामना […]

173
कृष
कृष

जशपुर. बगीचा ब्लॉक के निवासी नंदकिशोर सोनी के सुपुत्र कृष ने आज सुबह 7:00 बजे बाल्को कैंसर अस्पताल नवा रायपुर में अंतिम सांस ली। 13 वर्षीय मासूम कृष को ब्लड कैंसर था। पिछले 1 हफ्ते से वह जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा था। इस लड़ाई में उसके माता पिता आर्थिक तंगी से सामना कर रहे थे।  इलाज का खर्च इतना ज्यादा था कि बड़े अस्पतालों में इलाज कराना संभव नहीं था।

कृष उस दौरान सुर्खियों में आया जब कृष के पिता को पता चला उनके बच्चे को ब्लड कैंसर हो गया है। प्रारंभिक इलाज के लिए उसे अम्बिकापुर ले जाया गया था जहां डॉक्टरों को कृष का केस समझ मे नही आया। आम जिंदगी जीने वाले नंदकिशोर सोनी और उनकी पत्नी नीलम सोनी ने अपने कलेजे के टुकड़े को बेहतर इलाज मुहैया कराने हेतु राजधानी रायपुर के बालको अस्पताल में भर्ती कराया था जिसके लिए उन्हें समाजसेवी संस्था द्वारा मदद मिली थी। आर्थिक सहायता के लिए उन्होंने सरकार से भी गुहार लगाई थी। सहायता भी ऐसी मिली कि ज्यादा कुछ नहीं कर पाई। कुछ अपनी राजनैतिक रोटी सेक रहे थे तो कुछ मदद करने का आश्वासन देकर गायब हो जाते थे।

जब निराश हताश पिता की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई और अस्पताल का 16 हजार कर्जा भी चढ़ गया. तब बच्चे का इलाज बन्द कर अस्पताल से रिलीफ कर दिया गया था। अस्पताल से निकलते ही बच्चे के यूरिन से ब्लड आने लगा तो किसी तरह फिर से अस्पताल में मिन्नतों के बाद रखा गया. लाचार मजबूर पिता स्थानीय लोगों से मदद की अपील की। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में मदद की अपील की तो कुछ ने अपने स्तर से आर्थिक सहायता की। बगीचा के स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने विधायक के सामने चंदा कर 16 हजार समाजसेवियों के पहल पर भेजा, जिससे इलाज प्रारम्भ हो सका। दो दिन बाद कृष के स्कूल के बच्चों ने सड़को दरवाजों की चौकठो में आहट देकर मदद की अपील और चंदा किया।

इतनी कोशिशों के बावजूद  कृष  को  नहीं बचा सके। प्रदेश का सिस्टम इतना कमजोर निकला के एक मासूम जिसे यह भी नहीं मालूम था कि ब्लड कैंसर क्या होता है उसे बेहतर इलाज भी मुहैया नहीं करा पाई। मासूम कृष की गुहार शासन तक नहीं पहुंच पाई और इसी बीच मासूम ने अपनी उम्मीद के साथ दुनिया भी छोड़ दी।