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अजीत जोगी के किले में भूपेश बघेल का मास्टर स्ट्रोक.. सियासत अभी बाकी है…..

अर्धेन्दु मुखर्जी, संपादक गौरेला-पेंड्रा को बिलासपुर से अलग कर अलग जिले का दर्जा दिए जाने की घोषणा के साथ ही सियासी हलके में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कोई इसे सीएम भूपेश बघेल का मास्टर स्ट्रोक करार दे रहा है तो कोई जोगी की सियासत को खत्म करने के लिए बड़ा दांव… बता […]

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अजीत जोगी के किले में भूपेश बघेल का मास्टर स्ट्रोक.. सियासत अभी बाकी है…..

अर्धेन्दु मुखर्जी, संपादक

गौरेला-पेंड्रा को बिलासपुर से अलग कर अलग जिले का दर्जा दिए जाने की घोषणा के साथ ही सियासी हलके में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कोई इसे सीएम भूपेश बघेल का मास्टर स्ट्रोक करार दे रहा है तो कोई जोगी की सियासत को खत्म करने के लिए बड़ा दांव… बता दें कि गौरेला-पेंड्रा इलाका जोगी का गढ़ माना जाता है लिहाजा सीधे तौर पर भूपेश बघेल की दिलचस्पी इस इलाके में है।

दरअसल पिछले कई सालों से इस क्षेत्र में जोगी परिवार का दखल था। चाहे मरवाही विधानसभा हो या फिर कोटा विधानसभा दोनों ही विधानसभा क्षेत्र जोगी परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती है। वर्तमान में भी जिले के दो विधानसभा में जोगी परिवार का कब्जा है। मरवाही से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और कोटा से उनकी पत्नी रेणु जोगी जनता कांग्रेस से विधायक हैं। जाहिर है दोनों ही विधानसभा में सेंध लगाकर भूपेश बघेल ने एक बड़ा ही सियासी प्रहार किया है।

हालांकि सूबे में आधा दर्जन से ज्यादा इलाके अपने लिए जिले की मांग कर रहे हैं लेकिन बतौर सीएम भूपेश बघेल ने सिर्फ एक ही जिले की घोषणा की है। इससे सियासी गलियारी में यह चर्चा आम है कि यहां जोगी वर्सेस भूपेश की पटकथा का एक और अध्याय लिखा जा रहा है। हालांकि आने वाले वक्त में अन्य जिलों की मांग पूरी होने की संभावना है। आने वाले समय में नगरीय और पंचायती चुनाव है लिहाजा गौरेला-पेंड्रा इलाके में कांग्रेस की साख इस घोषणा मजबूत होगी।

बहरहाल स्वाभाविक रूप से अब गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र का विकास और तेजी से होगा क्योंकि बिलासपुर में शामिल यह इलाका जिला मुख्यालय से दूर था। अब यह नया जिला पेंड्रा गौरेला मरवाही के रूप में प्रदेश के मानचित्र में जल्द ही नजर आ जाएगा। लोगों की माने तो जिला मुख्यालय से 97 किलोमीटर की दूरी में बसे इस क्षेत्र में विकास थम सा गया था।

पेंड्रा गौरेला मरवाही को संयुक्त कर जिले बनाने की मांग लंबे समय से चली आ रही थी। इस मांग को पूरा करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अब 28 जिले होने की घोषणा कर दी है। जिस पहली बार छत्तीसगढ राज्य बना था और अजीत जोगी मरवाही से चुनकर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने थे , उस वक्त से ही वहां के लोगों की इस क्षेत्र को अलग जिला बनाने की मांग थी लेकिन वो हो ना सका।

बाद में भाजपा की सरकार आई और उन्होंने भी इस मांग को पूरा नहीं किया। प्रदेश में 15 सालों का वनवास काटने के बाद एक बार फिर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने जिले की मांग को पूरा करने का काम कर दिया है। पहले भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने घोषणा की थी कि हमारी सरकार इन 5 सालों के अंदर पेंड्रा गौरेला मरवाही को जिले का सम्मान जरूर दिलाएगी। 15 अगस्त के दिन हुए घोषणा से पेंड्रा गौरेला मरवाही के लोगों में उत्साह उत्साह का माहौल है। इस घोषणा से क्षेत्रवासियों को विकास के स्वप्न अब आंखों में दिखने लगे हैं।