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सालों से जर्जर भवन में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पढ़ने को मजबूर, प्रशासन बड़े हादसे के इंतज़ार में……

संजू गुप्ता@कवर्धा। कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत दामापुर आश्रम में 20 से अधिक गांवों के लगभग 75 छोटे-छोटे आदिवासी बच्चे जर्जर भवन में रहने और पढ़ने को मजबूर हैं। कहने को तो इन्हें राष्ट्रपति ने गोद लिया था, लेकिन इनकी हालत और भवन का हाल देखकर समझा जा सकता है कि प्रशासन […]

संजू गुप्ता@कवर्धा। कवर्धा जिले के पंडरिया विकासखंड के ग्राम पंचायत दामापुर आश्रम में 20 से अधिक गांवों के लगभग 75 छोटे-छोटे आदिवासी बच्चे जर्जर भवन में रहने और पढ़ने को मजबूर हैं। कहने को तो इन्हें राष्ट्रपति ने गोद लिया था, लेकिन इनकी हालत और भवन का हाल देखकर समझा जा सकता है कि प्रशासन इनका कितना ख्याल रख रही है।

पढ़-लिखकर जीवन में कुछ कर गुज़रने की चाह रखने वाले ये सभी बच्चे 36 साल पुराने इस जर्जर भवन में अपनी जान हथेली में रखकर रहने और पढ़ने को मजबूर हैं।भवन को ठीक करने के नाम पर प्रशासन की ओर से आज तक सिर्फ खानापूर्ति ही की गई है।

 

हैरत की बात है इस पूरे परिसर में 8 कक्षा संचालित करने और 75 बच्चों के लिए सिर्फ 4 ही कमरे हैं। कमरों का भी हाल देखते ही बनता है। कमरों की कमी की वजह से एक ही कमरें में बच्चों को पढ़ाया जाता है, उसी कमरे में शिक्षकों ने अपना दफ्तर खोल रखा है। बात यही खत्म नहीं होती, इस कमरे का उपयोग स्टोर रूम की तरह भी हो रहा है।

बड़ी-बड़ी बातें करने वाले और पुरूस्कार लेने वाले अधिकारियों के पास भी शायद इस बात का जवाब ना हो कि इस छात्रावास में रहने वाले बच्चों के पास ढंग से बैठकर खाना खाने की सुविधा क्यों नहीं है? बारिश के मौसम में इस भवन की हालत बद से बद्तर हो जाती है, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं खुलती।

छत से धीरे-धीरे प्लास्टर उखड़ते हुए साफ देखा जा सकता है। उसी छत के नीचे बैठकर बच्चे पढ़ने और रहने को मजबूर हैं, क्योंकि इनकी आवाज़ प्रशासन तक नहीं पहुंच पाती।इस जिले के ज़्यादातर भवनों की हालत कमोबेश ऐसी ही है लेकिन प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

जनता कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष अश्वनी यदु के मुताबिक इस परिसर में स्थित भवन का भगवान ही मालिक है। स्थिति की गंभीरता को इस बात से समझी जा सकती है कि खुद अधीक्षक भी अपने जर्जर कमरे में सोने से परहेज करते हैं, अगर कभी सोना भी होता है तो कमरे के कोने में दुबक कर सो जाते हैं। छात्रावास में खाना बनाने से लेकर खाना खाने तक की विकट समस्या है। बहरहाल जनता कांग्रेस ने मांग की है कि जल्द ही इसकी मतम्मत की जाए, ताकि बच्चें अच्छे से रह कर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। लेकिन सूरत-ए-हाल देखकर समझा जा सकता है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतज़ार में बैठी है।